औपनिवेशिक शहर नगरीकरण, नगर योजना, स्थापत्य

औपनिवेशिक शहर नगरीकरण, नगर योजना, स्थापत्य: इस आर्टिकल में कक्षा 12 के इतिहास विषय के 12वी अध्याय के सभी महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर दिए गए है जो 12 कक्षा की वार्षिक परीक्षा के लिए अति मतावपूर्ण है। यहा लिखे गए सभी प्रश्न उत्तर एनसीईआरटी की किताब से लिए गए है।

औपनिवेशिक शहर कुछ महत्वपूर्ण स्मरणीय तथ्य

  1. 1500-1700: यूरोपीय व्यापारिक कंपनियां भारत में अपने ठिकाने स्थापित करती है।
  2. 1757: युद्ध में अंग्रेजों की निर्णायक जीत होती है।वे बंगाल के शासक बन जाते हैं।
  3. 1773: ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना।
  4. 1853: बम्बई से थाने तक रेल लाइन बिछाई जाती है।
  5. 1857: बम्बई मद्रास और कलकत्ता में विश्वविद्यालय की स्थापना होती है।
  6. 1869: बड़े शहरों में प्लेग फैलने लगता है।
  7. 1911: कलकत्ता की जगह दिल्ली को राजधानी बनाया गया।
  8. 1872: भारत में पहला जनगणना प्रयास।
  9. 1878: सर्वे ऑफ इंडिया।का गठन किया गया।
  10. 1661: बम्बई को ब्रिटेन के राजा ने कंपनी को दे दिया।
  11. हिल स्टेशन: फौजियों के ठहराने, सीमा की चौकसी करने और शत्रु के खिलाफ़ हमला बोलने के लिए महत्वपूर्ण स्थान थे।
  12. अमार कथा: यह बंगाल की प्रसिद्ध नाटककार विनोदिनी दासी की आत्मकथा थी जो 1910 से 1913 के बीच लिखा गया। वह समाज सुधारक भी थी।
  13. गार्डर हाउसेज: मद्रास में अंग्रेजों ने बगीचों वाले मकान बनाए जिन्हें गार्डन हाउसेस कहा गया।
  14. पेठ: यह एक तमिल शब्द है जिसका अर्थ ‘बस्ती’ होता है।
  15. बंगलों: यह शब्द बंगाल के ‘बंगला’ शब्द से निकला है जो परंपरागत फूस से बनी झोपड़ी होती थी।

औपनिवेशिक शहर एक अंकीय उत्तरीय प्रश्न उत्तर

Q.1. डच कंपनी की स्थापना की स्वर से हुई थी?
Ans: 1585
Q.2. पूर्तगलियों ने गोवा पर किस वर्ष अधिकार कर लिया था?
Ans: 1510
Q.3. वास्कोडिगामा भारत कब आया था?
Ans: 1502
Q.4. डुप्ले कौन था?
Ans: भारत में फ़्रांसीसी गवर्नर।
Q.5. कर्नाटक का पहला युद्ध कब हुआ था?
Ans: 1746-48
Q.6. पांडिचेरी की संधि कब हुई थी?
Ans: 1754
Q.7. कोलकाता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना कब हुई थी?
Ans: 1773
Q.8. दक्षिण में अंग्रेजों ने पहली फैक्ट्री कहा स्थापित की?
Ans: मसुलीपटनम
Q.9. पूर्वी इंडिया कंपनी भारत कब आई?
Ans: 1600
Q.10. गोवा पर आक्रमण करने वाला कौन था?
Ans: अलफाँसो डी अलबुकर्क
Q.11. डच पूर्वी इंडिया कंपनी की स्थापना कब हुई?
Ans: 1602
Q.12. किस संधि के बाद अंग्रेजों को मद्रास वापस मिल गया?
Ans: ए- ला- रोपेल संधि
Q.13. भारत में रेलवे की शुरुआत कब हुई?
Ans: 1853
Q.14. पलासी का युद्ध कब हुआ?
Ans: 1757
Q.15. पहला हील स्टेसन शिमला कब स्थापित हुआ?
Ans: 1815-16

औपनिवेशिक शहर अति लघु उत्तरीय प्रश्न

Q.1. सहायक संधि प्रथा क्या थी?
Ans: सहायक संधि प्रथा की नीति के अनुसार किसी सहयोगी भारतीय राज्य के शासक को ब्रिटिश सेना अपने राज्य में रखनी पड़ती थी तथा उसके रखरखाव के लिए अनुदान पढ़ता था वास्तव में सहायक संधि पर हस्ताक्षर करके कोई भारतीय राज्य अपने स्वाधीनता लगभग गवाही बैठता था।

Q.2. डुप्ले की भारत में क्या महत्वाकांक्षा थी?
Ans: सन 1972 में डुप्ले फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी का गवर्नर बन कर आया। वह भारत पर फ्रांस का साम्राज्य स्थापित करना चाहता था इसके लिए वह अंग्रेजों को सबसे बड़ा बाधक मानता था उसकी इसी महत्वाकांक्षा के कारण दोनों कंपनियों में तीन युद्ध हुए जो कर्नाटक के युद्धों के नाम से प्रसिद्ध है।

Q.3. भारत में फ्रांसीसीयों की असफलता के मुख्य कारण क्या थे?
Ans: भारत में फ़्रांसीसीओ की असफलता का मुख्य कारण था उनके अधिकारों के बीच आपस में लड़ाई थी। दूसरी और अंग्रेज सेनानायक योग्य थे और उनमें एकता थी।

Q.4. क्लाइव ने मुगलों का प्रभुत्व समाप्त करने के लिए किस नीति को अपनाया?
Ans: क्लाइव भारतीय सूक्तों में ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाने वाला पहला अंग्रेज सेनापति और राजनीतिज्ञ था इस नीति के सहारे उसने मुगलों के प्रभुत्व को समाप्त कर दिया।

Q.5. ईस्ट इंडिया कंपनी ने किससे बंगाल के दीवाने प्राप्त की थी?
Ans: शाह आलम द्वितीय से कंपनी ने बंगाल की दीवानी प्राप्त की थी। अब बंगाल के ऊपर कंपनी के नियंत्रण को कानूनी मान्यता मिल गई और इस सबसे समृद्ध भारतीय प्रांत का पूरा राजस्व उसके हाथ में आ गया।

लघु उत्तरीय प्रश्न

Q.6. ग्रामीण अंचल और कस्बे में अंतर स्पष्ट करे।
Ans: ग्रामीण अञ्चल और कस्बे में निम्नलिखित अंतर है:

  • ग्रामीण अंचलों में खेती बंगलों में संग्रहण या पशुपालन के द्वारा जीवन निर्वाह करते थे। इसके विपरीत कस्बों में शिल्पकार, व्यापारी, प्रशासक तथा शासक रहते थे जो पृष्ठ प्रकार की आर्थिक गतिविधियों और संस्कृति हो के प्रतिनिधि थे।
  • कस्बों में ग्रामीण जनता का प्रभुत्व होता था और वे खेती से प्राप्त करो और अधिशेष के आधार पर फलते फूलते थे। ग्रामीण लोग खेती के उत्पादन पर निर्भर रहते थे।
  • ब्रिटिश काल में कस्बों और नगर की प्रायः किलेबंदी की जाती थी जिससे इन्हें ग्रामीण इलाकों से अलग रखा जा सके।
  • ग्रामीण लोग अकाल के समय कस्बों में जमा हो जाते थे। इसी प्रकार जब कस्बों पर आक्रमण होते थे तो लोग प्रायः ग्रामीण क्षेत्रों में शरण लेते थे।
  • व्यापारी और फेरी वाले कस्बों से माल गांव ले जाकर बेचते थे।जिसके द्वारा बाजारों का सैलाब और उपभोग की नई शैलियों का सृजन होता था।

Q.7. प्लासी से युद्ध के परिणामों को लिखें।
Ans: प्लासी से युद्ध के परिणाम निम्नलिखित है:

  • बंगाल के साथ शासक अली वर्दी खां के वंश का शासन समाप्त हो गया।
  • अंग्रेजों का कठपुतली मीर जाफर बंगाल का नवाब बन गया।
  • मीर जाफर एक रबर का मुहर था। वास्तविक सत्ता ब्रिटिश कंपनी के हाथों में आ गई।
  • बंगाल के युद्ध व राजनीति के लिए अंग्रेजों को एक विस्तृत क्षेत्र प्राप्त हो गया।
  • प्लासी के युद्ध से अंग्रेजों को भारत में एक सुदृढ राजनीतिक व आर्थिक आधार प्राप्त हो गया।बंगाल से अंग्रेजों को भारी मात्रा में राजस्व प्राप्त होने लगा। इस राजस्व से अंग्रेजों को अपना सैन्य बल बढ़ाने में सहायता प्राप्त हुआ।

Q.8. बक्सर युद्ध के परिणामों को संक्षेप में लिखें।
Ans: बक्सर युद्ध के परिणाम निम्नलिखित है:

  • अंग्रेजों ने पलासी के युद्ध में जिस साम्राज्य की नींव रखने का प्रयास किया उसकी पूर्ति बक्सर के युद्ध ने कर दी। इतिहासकार स्मिथ ने ठीक ही लिखा है- बक्सर की विजय पूर्ण रूप से निर्णायक थी और उसने प्लासी की अधूरे कार्य को पूरा कर दिया।
  • पलासी के युद्ध में तो अंग्रेजों ने केवल बंगाल के नवाब को पराजित किया था, किंतु बक्सर के युद्ध में उन्होंने बंगाल के नवाब के साथ साथ अवध के नवाब व मुगल सम्राट को भी पराजित किया।
  • इस युद्ध ने भारतीय शासकों पर एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव डाला कि वे अंग्रेजों की कूटनीतिज्ञ व सैनिक दृष्टियों से मुकाबला करने में असमर्थ रही।

Q.9. इलाहाबाद की संधि क्या थी?
Ans: बक्सर युद्ध के पश्चात 1757 में क्लाइव ने मुगल सम्राट आलम और अवध के नवाब सिराजुद्दौला के साथ एक संधि की, जिसे इलाहाबाद की संधि के नाम से जाना जाता है। इस संधि के मुख्य बातें इस प्रकार है:

  • अवध प्रांत सिराजुद्दौला को लौटा दिया गया परंतु उससे कड़ा व इलाहाबाद के जिले ले लिए गए।
  • नवाब ने ₹50,00,000 हर्जाने के रूप में अंग्रेजों को दिया।
  • मुगल सम्राट शाह आलम ने अंग्रेजों को बंगाल, बिहार व ओडिशा के दीवानी का अधिकार प्रदान किया।
  • अंग्रेजों ने उसे ₹26,00,000 वार्षिक पेंशन देना स्वीकार किया।

इस प्रकार इलाहाबाद की संधि में अंग्रेजों को बंगाल का स्वामी बना दिया और अवध के नवाब पर भी उनका प्रभाव स्थापित हो गया।

Q.10. बक्सर युद्ध के मुख्य कारणों का संक्षेप में उल्लेख करें।
Ans: बक्सर युद्ध की मुख्य कारण निम्नलिखित है:

  • मीर कासिम एक योग्य शासक था। वह अंग्रेजी कंपनी के चंगुल से मुक्त होना चाहता था। अंग्रेज मुर्शीदाबाद में उसके विरुद्ध षड्यंत्र रच रहे थे, इसलिए उसने मुर्शीदाबाद के स्थान पर मुंगेर को राजधानी बना लिया और उसने वहाँ किलेबंदी करवाई जिससे अंग्रेजों को शंका होने लगा।
  • अंग्रेजों को तत्कालीन मुगल सम्राट से निशुल्क व्यापार की सुविधा प्राप्त थी जिसका अंग्रेज अधिकारियों ने दुरुपयोग करना आरंभ कर दिया था और अपने निजी व्यापार में भी इस सुविधा का लाभ उठाने लगे थे। मीर कासिम ने इन परिस्थितियों पर काबू पाने में असमर्थ था इसलिए उसने सभी व्यापारियों को करमुक्त कर व्यापार की सुविधा प्रदान कर दी, जो अंग्रेजों को असहनीय था।
  • मीर कासिम ने अंग्रेजों के विरुद्ध मुगल सम्राट शाह आलम अवध के नवाब शुजाउद्दौला से सहायता प्राप्त कर ली थी और अंग्रेजों के प्रभाव का अंत के लिए योजना बनाई।किंन्तु अंग्रेजों ने इसकी सम्मिलित सेना को पराजित किया। मीर कासिम रणभूमि छोड़कर भाग गया।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

Q.11. 1764 के बक्सर युद्ध के मुख्य परिणामों को लिखें।
Ans: बक्सर की लड़ाई भारत में अत्यंत निर्णायक सिद्ध हुई। इसमें प्लासी की लड़ाई का काम पूरा किया। बक्सर के युद्ध के बाद कंपनी भारत में सर्वोच्च शक्ति बन गई। 1765 में अवध के नवाब सिराजुद्दौला और मुगल सम्राट शाह आलम में इलाहाबाद में कलाई से समझौता कर कंपनी को बंगाल बिहार और उड़ीसा के दीवानी दे दी। अवध अंग्रेजों की दया पर निर्भर हो गया अवध के नवाब ने इलाहाबाद कौर और कड़ा मुगल बादशाह को दे दिए और मुगल बादशाह ब्रिटिश सेना के संरक्षण में कठपुतली बनकर इलाहाबाद में रहने लगा। मुगल बादशाह को प्रत्येक वर्ष 16 लाख कंपनी को ना देने का वचन किया। अवध के नवाब की सेना सीमित कर दिया मीर जाफ़र को फिर से बंगाल का नवाब बना दिया गया। उसकी मृत्यु के बाद उसका बेटा मीर नवाब बना। इस प्रकार बक्सर के युद्ध के बाद कंपनी सर्वोच्च शक्तिशाली बन गई। वस्तुतः मुगल सम्राट 6 वर्षों तक अंग्रेजों की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली अवध की रक्षा के लिए सेना का खर्चा मराठा राज्य के मध्य प्रतिरोधक राज्य के रूप में प्रयोग किया प्लासी की लड़ाई में जिस प्रक्रिया को केवल आरंभ किया बक्सर ने उसे पूरा किया। प्लासी की लड़ाई ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव रखी तो बक्सर की लड़ाई ने उसे सुदृढ़ कर दिया। जे. बी. मालसेन के अनुसार “चाहे आप इसे देसी तथा विदेशियों के मध्य द्वंद युद्ध समझे अथवा ऐसी सारगर्भित घटना जिसके परिणाम स्थाई तथा विशाल थे। बक्सर को सबसे निर्णायक युद्ध में गिना जाएगा इस विषय में अंग्रेजी साम्राज्य की सीमाएं इलाहाबाद तक पहुंच गई।

Q.12. मीर कासिम का एक शासक के रूप में वर्णन करें।
Ans: अलीवर्दी खान के अनुवर्ती नवाबों में मीर कासिम सबसे योग्य था। वह पहले ही पूर्णिया तथा रंगपुर के फौजदार के रूप में अपनी योग्यता दर्शा चुका था। वह राजधानी मुर्शिदाबाद से मुंगेर ले गया संभवत वह मुर्शिदाबाद के षड्यंत्र में वातावरण तथा कोलकाता से दूर रहना चाहता था ताकि अंग्रेजों का हस्तक्षेप अधिक ना हो।
मीर कासिम ने सेना का गठन यूरोपीय पद्धति पर करने का निश्चय किया। मुंगेर में तोपों तथा तोड़ेदार बंदूकों को बनाने की व्यवस्था की। नवाब को शहजादा अलीगढ़ जो अभी तक बिहार में था, से भी बचना था। दूसरे, वह नेपाल की और अपने राज्य का विस्तार करना चाहता था। वह बंगाल तथा बिहार के उद्दंड जमींदारों का भी दमन करना चाहता था जिन्होंने कई बार नवाब की आज्ञा का उल्लंघन किया था। वह लोग किसी भी राजा के लिए खतरा बन सकते थे बिहार का उप सूबेदार राम नारायण नवाब के सत्ता के विरुद्ध अंग्रेजों से समर्थन की आशा करता था। रामनारायण ने मीर जाफर की सत्ता को भी स्वीकार नहीं किया। केवल क्लाइव के हस्तक्षेप के कारण ही वह मीर जाफर से बचा रहा जब अंग्रेजों के समर्थन से यह लगभग स्वतंत्र सा बन गया वह मीर कासिम के प्रति भी निष्ठावान नहीं था। नवाब की बार-बार आ गया पर भी उसने बिहार की आय का ब्यौरा नहीं दिया। मीर कासिम अपनी सत्ता के इस स्पष्ट उल्लंघन को सहन नहीं कर सका। उसने गवर्नर बेनसीटर्ट की सहमति से पहले रामनारायण को निलंबित किया फिर सेवा से हटा दिया तथा मार डाला।
इसके पश्चात मीर कासिम ने राज्य की आर्थिक स्थिति को सुधारने का प्रयत्न किया जिसे अधिकारियों ने गबन किया था। उन पर बड़े-बड़े जरमाने किए गए कुछ नए कर लगाए गए तथा पुराने करो पर 3/22 भाग अतिरिक्त कर के रूप में लगाया गया। उसने एक और कर- कर ए- खिजरी जमा जो अभी तक अधिकारियों द्वारा छुपाया जाता रहा था, भी प्राप्त किया। सियार उल मुटखेरींन के लेखक ने तो मीर कासिम के प्रशासन को बहुत सराहा है। वह लिखता है कि मीर कासिम ने प्रशासन की गुत्थियों को विशेषकर वित्तीय मामलों को भी बड़ी कुशलता से सुलझाया। सेना तथा सेवकों को नियमित रूप से वेतन मिलता था, अच्छे लोगों का आदर्श होता था, उन्हें पुरस्कृत किया जाता था। वहाँ कैसा व्यय करना है, उदारता से अथवा कृपन्नता से इन सभी योग्यताओं में वह समकालीन राजाओं में अद्वितीय था।

Q.13. आधुनिक भारतीय इतिहास में प्लासी युद्ध का क्या महत्व है? विस्तार से समझाइए।
Ans: आधुनिक भारत के इतिहास में प्लासी युद्ध का कोई विशेष सामरिक महत्व नहीं था। यह युद्ध ना होकर एक छोटी सी झड़प थी जिसमें कंपनी के कुल 65 सैनिक एवं नवाब के कुल 5000 सैनिक हताहत हुए। नवाब के साथियों ने विश्वासघात करने में कोई कसर नहीं छोड़ी कूटनीति में माहिर क्लाइव ने जगत सेठ को भय दिखाया मीर जाफर की महत्वाकांक्षाओं को जगाया और बिना किसी कठिनाई के युद्ध जीत लिया।
प्लासी के युद्ध के पश्चात होने वाली घटनाओं के कारण ही महत्वपूर्ण है बंगाल अंग्रेजों के अधीन हो गया और स्वतंत्र नहीं हो सका नया नवाब मीर जाफर अपनी रक्षा तथा पद के लिए अंग्रेजों पर निर्भर था उनकी 6000 से ना उसकी रक्षा के हेतु बंगाल में स्थित है।धीरे- धीरे समस्त शक्ति कंपनी के हाथों में चली गई उसकी असमर्थता का अनुमान इस बात से लगा सकते हैं कि वह दीवान राय दुर्लभ तथा रामनारायण को उनके विश्वासघाट के लिए दंडित करना चाहता था। मुसलमान इतिहासकार गुलाम हुसैन लिखता है कि पदोन्नति के लिए केवल अंग्रेज का समर्थन आवश्यक था शीघ्र ही मीर जाफर अंग्रेजों के जुए से दुखी हो गया। वह डच लोगों से मिलकर अंग्रेजों को बाहर निकालने का षडयंत्र रचने लगा। क्लाइव ने इस षड्यंत्र को नवंबर, 1759 में लड़े बेदारा के युद्ध में डच लोगो को परास्त कर विफल कर दिया जब मीर जाफर ने भावी घटनाओं को समझने से इंकार कर दिया तो उसे 1760 में कंपनी के मनोनीत व्यक्ति मीर कासिम के लिए स्थान छोड़ना पड़ा। प्लासी के युद्ध तथा उसके पश्चात होने वाले लूट ने अंग्रेजों को अनन्त साधनों का स्वामी बना दिया। पहली किस्त जो अंग्रेजों को मिली वह 800000 पौंड थी जो चांदी के सिक्कों के रूप में ही थी। मेकाले के अनुसार यह धन कोलकाता को एक सौ से अधिक नामों में भरकर लाया गया। बंगाल उस समय भारत का सबसे धनाढ्य प्रांत था और उद्योग व्यापार में सबसे आगे था।
प्लासी के युद्ध किताब उसके पश्चात होने वाले लूटने अंग्रेजों को अंततः साधनों का स्वामी बना दिया पहले किस्त जो अंग्रेजों को मिले वह 800000 पौंड थी जो चांदी के सिक्कों के रूप में ही थी। 1767 वेरेलस्त लिखता है कि बंगाल समस्त भारत का व्यापार केंद्र है जहां सारा धन खिंचा चला आता है यहां की बनी वस्तुएं भारत के दूरस्थ प्रदेशों में बिकती है। बंगाल के इस धन की सहायता से ही अंग्रेजों ने दक्कन विजय कर लिया तथा उत्तरी भारत को भी प्रभाव में ले लिया।

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