mahila jati evam sudhar

महिलाएँ जाति एवं सुधार कक्षा 8 इतिहास अध्याय 9 समाधान।

महिलाएँ जाति एवं सुधार: इतिहास कक्षा 8 अध्याय 9 के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर। कक्षा 8 इतिहास NCERT समाधान हिंदी में। कक्षा 8 के सभी विषयों के हिंदी में समाधान देखने के लिए झारखण्ड पाठशाला एक बेतरीन वेबसाइट है। सभी प्रश्नों को वार्षिक परीक्षा को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है। झारखण्ड पाठशाल को आप अन्य जगहों जैसे YouTube, Facebook, Instagram और Quora इत्यादि।

महिलाएँ जाति एवं सुधार: महत्वपूर्ण स्मरणीय तथ्य

  • राजा राममोहन राय एक समाज सुधारक थे उन्होंने कोलकाता में “ब्राह्मण सभा” के नाम से एक सुधारवादी संगठन बनाया था।
  • राममोहन राय देश में पश्चिमी शिक्षा का प्रसार करने और महिलाओं के लिए ज्यादा स्वतंत्रता और समानता के पक्षधर थे।
  • 1829 में राजा राममोहन राय के प्रयासों के कारण सती प्रथा पर पाबंदी लगा दी गई।
  • सन 1856 में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के प्रयासों से विधवा विवाह के पक्ष में एक कानून पारित किया गया।
  • दयानंद सरस्वती ने 1875 में आर्य समाज की स्थापना की थी आर्य समाज ने हिंदू धर्म को सुधारने का प्रयास किया था।
  • राजा राममोहन राय एक समाज सुधारक थे उन्होंने कोलकाता में “ब्राह्मण सभा” के नाम से एक सुधारवादी संगठन बनाया था।
  • राममोहन राय देश में पश्चिमी शिक्षा का प्रसार करने और महिलाओं के लिए ज्यादा स्वतंत्रता और समानता के पक्षधर थे।
  • 1829 में राजा राममोहन राय के प्रयासों के कारण सती प्रथा पर पाबंदी लगा दी गई।
  • सन 1856 में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के प्रयासों से विधवा विवाह के पक्ष में एक कानून पारित किया गया।
  • दयानंद सरस्वती ने 1875 में आर्य समाज की स्थापना की थी आर्य समाज ने हिंदू धर्म को सुधारने का प्रयास किया था।
  • पंडिता रमाबाई जो संस्कृत की महान विद्वान थी उन्होंने पुणे में एक विधवागृह की स्थापना की थी। इस विधवागृह में उन महिलाओं को जो ससुराल वालों के अत्याचार झेल रही थी, उन्हें पनाह दी जाती थी।
  • 1929 में बाल विवाह निषेध अधिनियम पारित किया गया।

महिलाएँ जाति एवं सुधार NCERT प्रश्न उत्तर

Q.1. निम्नलिखित लोगों ने किन सामाजिक विचारों का समर्थन और प्रसार किया :

1. राममोहन रॉय
2. दयानंद सरस्वती
3. वीरेशलिंगम पंतुलु
4. ज्योतिराव फुले
5. पंडिता रमाबाई
6. पेरियार
7. मुमताज़ अली
8. ईश्वरचंद्र विद्यासागर

उत्तर:

1. राममोहन रॉय – ब्रह्म समाज की स्थापना तथा सती प्रथा का विरोध
2. दयानंद सरस्वती – आर्य समाज की स्थापना तथा विधवा विवाह का समर्थक
3. वीरेशलिंगम पंतुलु – विधवा पुनर्विवाह
4. ज्योतिराव फुले – सत्यशोधक समाज की स्थापना तथा जाति आधारित समाज का विरोध
5. पंडिता रमाबाई – पुणे में विधवा गृह की स्थापना
6. पेरियार – हिंदू धर्म ग्रंथों के आलोचक
7. मुमताज़ अली – मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा
8. ईश्वरचंद्र विद्यासागर – महिला शिक्षा

Q.2. निम्नलिखित में से सही या गलत बताएँ :

  •  जब अंग्रेजों ने बंगाल पर कब्जा किया तो उन्होंने विवाह, गोद लेने, संपत्ति उत्तराधिकार आदि के बारे में नए कानून बना दिए।
    सही
  • समाज सुधारकों को सामाजिक तौर-तरीकों में सुधार के लिए प्राचीन ग्रंथों से दूर रहना पड़ता था।
    गलत
  • सुधारकों को देश के सभी लोगों का पूरा समर्थन मिलता था।
    गलत
  • बाल विवाह निषेध अधिनियम 1829 में पारित किया गया था।
    सही

Q.3. प्राचीन ग्रंथों के ज्ञान से सुधारकों को नए कानून बनवाने में किस तरह मदद मिली?
उत्तर: प्राचीन ग्रंथों के ज्ञान से सुधारकों को नए कानून बनवाने में निम्नलिखित तरह मदद मिली:

  1. संचार के नए तरीके विकसित हो गए थे।
  2. पहली बार किताबें, अखबार, पत्रिकाएँ, पर्चे और पुस्तिकाएँ छप रही थीं, ये चीजें पुराने साधनों के मुकाबले सस्ती थीं, इसलिए ज्यादा लोगों की पहुँच में भी थी।
  3. नए शहरों में हर प्रकार के सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और धार्मिक मुद्दों पर चर्चाएँ आम जनता तक पहुँचीं।

Q.4. लड़कियों को स्कूल न भेजने के पीछे लोगों के पास कौन-कौन से कारण होते थे?
उत्तर: लड़कियों को स्कूल ना भेजने के लोगों के पास बहुत सारे कारण होते थे जिनमें से कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

  1. लोगों का कहना था कि स्कूल जाने से लड़कियाँ घरों से दूर भागने लगेंगी। इससे वे अपना पारंपरिक घरेलू काम नहीं कर पाएँगी।
  2. लड़कियों को स्कूल जाने के लिए सार्वजनिक स्थानों से होकर जाना पड़ता है जो उनके लिए ठीक नहीं है।
  3. लड़कियों के आचरण पर बुरा प्रभाव पड़ेगा और वे बिगड़ जाएँगी।

Q.5. ईसाई प्रचारकों की बहुत सारे लोग क्यों आलोचना करते थे? क्या कुछ लोगों ने उनका समर्थन भी किया होगा? यदि हाँ तो किस कारण?
उत्तर: लोगों द्वारा ईसाई धर्म प्रचारकों की आलोचना के कारण:

  1. भारतीय संस्कृति को नष्ट कर पाश्चात्य संस्कृति को भारतीयों पर लाद देंगे।
  2. जनजातीय समूहों तथा निम्न जाति के लोगों का धर्म परिवर्तन कर देंगे।

लोगो द्वारा ईसाई धर्म प्रचारकों की समर्थन के कारण:

  1. ये स्त्री-शिक्षा तथा पुरुषों के समानता के अधिकार के पक्षधर थे।
  2. जनजातीय लोगों तथा निम्न जाति के लोगों के लिए स्कूलों की स्थापना की।

Q.6. अंग्रेजों के काल में ऐसे लोगों के लिए कौन से नए अवसर पैदा हुए जो “निम्न” मानी जाने वाली जातियों से संबंधित थे?
उत्तर: अंग्रेजों के काल में जिस्मानी जाने वाली जातियों के संबंध में बहुत सारे नए अवसर पैदा हुए जिनमें से प्रमुख अवसर निम्नलिखित हैं:

  1. उन्नीसवीं सदी में ईसाई प्रचारक आदिवासी समुदायों और निचली” जातियों के बच्चों के लिए स्कूल खोलने लगे थे।
  2. शहरों में रोजगार के नए-नए अवसर सामने आ रहे थे; जैसे-मकान, पार्क, सड़कें, नालियाँ, बाग, मिलें, रेलवे लाइन, स्टेशन आदि के निर्माण के लिए मजदूरों की आवश्यकता थी। इन कामों के लिए शहर जाने वालों में से बहुत सारे ‘निम्न जातियों के लोग थे।
  3. बहुत सारे लोग असम, मॉरीशस, त्रिनीदाद और इंडोनेशिया आदि स्थानों पर बाग़ानों में काम करने के | लिए भी जा रहे थे।

Q.7. ज्योतिराव और अन्य सुधारकों ने समाज में जातीय असमानताओं की आलोचना को किस तरह सही ठहराया?
उत्तर: ज्योतिराव और अन्य सुधारकों ने समाज में जातीय असमानताओं की आलोचना को निम्नलिखित तरीकों से सही ठहराया:

  1. ज्योतिराव फुले ने ब्राह्मणों की इस बात को गलत ठहराया कि आर्य होने के कारण वे अन्य लोगों से
    श्रेष्ठ हैं। फुले का तर्क था कि आर्य उपमहाद्वीप के बाहर से आए थे उन्होंने यहाँ के मूल निवासियों को हरा कर गुलाम बना लिया तथा पराजित जनता को निम्न जाति वाला मानने लगे।
  2. पेरियार ने हिंदू वेद पुराणों की आलोचना की उनका मानना था कि ब्राह्मणों ने निचली जातियों पर अपनी सत्ता तथा महिलाओं पर पुरुषों का प्रभुत्व स्थापित करने के लिए इन पुस्तकों का सहारा लिया है।
  3. हरिदास ठाकुर ने भी जाति व्यवस्था सही ठहराने वाले ब्राह्मणवादी ग्रंथों पर सवाल उठाया।
  4. अम्बेडकर ने भी मंदिर प्रवेश आंदोलन’ के द्वारा समकालीन समाज में उच्च’ जातीय संरचना पर सवाल उठाए। वह इस आंदोलन के द्वारा पूरे देश को दिखाना चाहते थे कि समाज में जातीय पूर्वाग्रहों की जकड़ कितनी मजबूत है।

Q.8. फुले ने अपनी पुस्तक गुलामगीरी को गुलामों की आज़ादी के लिए चल रहे अमेरिकी आंदोलन को समर्पित क्यों किया?
उत्तर: 1873 में फुले ने गुलामगीरी (गुलामी) नामक एक पुस्तक लिखी। फुले के पुस्तक लिखने से 10 वर्ष पूर्व अमेरिका में गृहयुद्ध के फलस्वरूप दास प्रथा का अंत हो। चुका था। फुले ने भारत की “निम्न जातियों और अमरीका के काले गुलामों की दुर्दशा को एक-दूसरे से जोड़कर देखा। इसलिए फुले ने अपनी पुस्तक को उन सभी अमेरिकियों को समर्पित किया, जिन्होंने गुलामों को मुक्ति दिलाने के लिए संघर्ष किया था।

Q.9. मंदिर प्रवेश आंदोलन के ज़रिए अंबेडकर क्या हासिल करना चाहते थे?
उत्तर: 1927 में 1935 के बीच अंबेडकर ने मंदिरों में प्रवेश के लिए तीन मंदिर प्रवेश’ आंदोलन चलाए। जिसके माध्यम से वह देश को दिखाना चाहते थे कि समाज में जातीय पूर्वाग्रहों की जकड़ कितनी मजबूत है, लेकिन लगातार विरोध करने पर इसको कमजोर किया जा सकता है।

महिलाएँ जाति एवं सुधार अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

Q.1. रूढ़ीवादी से क्या अभिप्राय है?
Ans: रूढ़िवादी उन लोगों को कहा जाता है जो पुरानी परंपराओं को मानते हैं।

Q.2. स्त्रीपुरुषतुलना क्या थी?
Ans: स्त्रीपुरुषतुलना एक किताब थी जिसे ताराबाई शिंदे ने लिखा था। इस किताब में पुरुषों और महिलाओं के बीच मौजूद सामाजिक फर्को की आलोचना की गई थी।

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